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उत्तरायण और दक्षिणायन कब से कब तक होता है? तारीख, अवधि और महत्व

भारतीय पंचांग में वर्ष दो भागों में बाँटा जाता है — उत्तरायण और दक्षिणायन। यह सूर्य की गति से जुड़े हुए सांस्कृतिक और वैदिक समयचक्र हैं। उत्तरायण और दक्षिणायन का संबंध मुख्य रूप से सूर्य के मकर संक्रांति और कर्क संक्रांति में प्रवेश से माना जाता है।
यह topic अक्सर इसलिए पूछा जाता है कि उत्तरायण कब होता है? दक्षिणायन कब होता है? क्या यह एक दिन होता है या छह महीने? और हिन्दू पञ्चांग में इसका धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व क्या है?
सूर्य के संक्रांति और राशि परिवर्तन का विस्तृत विवरण देखें:
उत्तरायण क्या है?
उस काल को उत्तरायण कहते हैं जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और इसके बाद छह महीनों तक सूर्य उत्तर दिशा की ओर प्रगति करता हुआ माना जाता है। इस काल को देवायण भी कहा जाता है।
उत्तरायण की सांस्कृतिक परिभाषा
✔ सूर्य का मकर राशि में प्रवेश
✔ देवताओं का समय (देवायण)
✔ शुभ और उर्जावान काल
दक्षिणायन क्या है?
वह काल है दक्षिणायन जब सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करता है और इसके बाद छह महीने दक्षिण दिशा की ओर प्रगति करता हुआ माना जाता है। इस काल को पितृायण कहा जाता है।
दक्षिणायन की सांस्कृतिक परिभाषा
✔ सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश
✔ पितरों का समय (पितृायण)
✔ शांत और तपस्वी काल
उत्तरायण कब से कब तक होता है? (Duration View)
उत्तरायण की अवधि:
मकर संक्रांति से शुरू → कर्क संक्रांति तक
यानी लगभग 6 महीने
दक्षिणायन कब से कब तक होता है? (Duration View)
दक्षिणायन की अवधि:
कर्क संक्रांति से शुरू → मकर संक्रांति तक
यानी लगभग 6 महीने
क्या उत्तरायण सिर्फ एक दिन है या पूरा 6 महीना?
बहुत लोग पूछते हैं:
“उत्तरायण एक दिन है या छह महीने?”
उत्तर:
✔ संक्रांति एक दिन होती है
✔ आयन छह महीने की अवधि होती है
यानी:
➡ मकर संक्रांति = उत्तरायण का आरंभ
➡ कर्क संक्रांति = दक्षिणायन का आरंभ
उत्तरायण कब लगता है? (Sankranti View)
पंचांग अनुसार:
➡ मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायण में प्रवेश करता है
दक्षिणायन कब लगता है? (Sankranti View)
पंचांग अनुसार:
➡ कर्क संक्रांति के दिन सूर्य दक्षिणायन में प्रवेश करता है
देवायण और पितृायण क्या है?
वैदिक परंपरा में वर्ष को दो भागों में बाँटा गया:
देवायण (उत्तरायण)
✔ देवता का समय
✔ शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ
पितृायण (दक्षिणायन)
✔ पितृों का समय
✔ तप, साधना और शांति वाला काल
उत्तरायण और दक्षिणायन का धार्मिक महत्व
इन्हें वैदिक व पौराणिक ग्रंथों में अत्यंत महत्व दिया गया है क्योंकि:
✔ शुभ कार्यों का चयन
✔ तपस्या/साधना का समय
✔ यज्ञ/दान/संकल्प
✔ विवाह/गृहस्थ जीवन निर्णय
इन सबका काल-चयन आयन से जुड़ा हुआ माना गया है।
उत्तरायण और त्योहार
सबसे बड़ा उत्सव:
⭐ मकर संक्रांति
➡ उत्तरायण का आरंभ
➡ तिल-गुड़ का महत्त्व
➡ सूर्य पूजा
➡ नए समयचक्र का स्वागत
साथ में कई राज्यों में अलग नाम:
✔ गुजरात — उत्तरायण
✔ तमिलनाडु — पोंगल
✔ आंध्र — मकर संक्रांति
✔ पंजाब — लोहड़ी
दक्षिणायन और साधना
दक्षिणायन साधना, तप, व्रत, पितृकार्य और शांति का काल माना गया है।
सूर्य संक्रांति और राशि परिवर्तन (Panchang View)
सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है।
इसमें मकर संक्रांति और कर्क संक्रांति दोनों महत्वपूर्ण हैं।
Vedantic & Panchang Combined View
संक्रांति = आरंभ
आयन = अवधि (6 महीने)
यही सबसे balanced और clear interpretation है।
मकर एवं कर्क संक्रांति की तिथि पंचांग में देखी जाती है (संक्रांति तिथि देखें — Drik Panchang):
https://www.drikpanchang.com/
उत्तरायण और दक्षिणायन- लोग क्यों पूछते हैं “कब से कब तक”?
क्योंकि यह तीन जगह impact करता है:
✔ धर्मिक कार्य
✔ पंचांग & मुहूर्त
✔ कृत्य/त्योहार चयन
Google पर यह इसलिए rank होता है क्योंकि यह Q&A intent है।
उत्तरायण और दक्षिणायन — सार
| पहलू | उत्तरायण | दक्षिणायन |
|---|---|---|
| आरंभ | मकर संक्रांति | कर्क संक्रांति |
| अवधि | 6 महीने | 6 महीने |
| नाम | देवायण | पितृायण |
| गुण | उत्सव/शुभ | साधना/शांत |
| दिशा भाव | उत्तर | दक्षिण |
FAQ — उत्तरायण और दक्षिणायन
Q. उत्तरायण कब लगता है?
मकर संक्रांति से।
Q. दक्षिणायन कब लगता है?
कर्क संक्रांति से।
Q. क्या उत्तरायण एक दिन होता है?
संक्रांति एक दिन, आयन छह महीने।
Q. उत्तरायण का दूसरा नाम क्या है?
देवायण।
Q. दक्षिणायन का दूसरा नाम क्या है?
पितृायण।
Conclusion — उत्तरायण और दक्षिणायन
उत्तरायण और दक्षिणायन भारतीय समयचक्र का गहरा धार्मिक व सांस्कृतिक हिस्सा हैं।
सूर्य की संक्रांति से आरंभ और छह महीने की अवधि तक चलते हुए देवायण और पितृायण पूरे वर्ष के कार्य-विभाग और शुभाशुभ काल को निर्धारित करते हैं।
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